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Wednesday, December 30, 2015

Innate-nature elucidates Purpose of Being

"किसी भी इकाई का स्वभाव उसके सहअस्तित्व सहज प्रयोजन (धर्म) को स्पष्ट करता है.  कोई भी इकाई अस्तित्व में क्यों है - इस प्रश्न का उत्तर उसके स्वभाव को पहचानने से मिलता है.  स्वभाव ही वस्तु का मूल्य है या मौलिकता है.  मैं अपने प्रयोजन (धर्म) को पहचानता हूँ तो मेरा स्वभाव में स्थापित होना सहज होता है."  - श्री ए नागराज

"The Innate-nature of any unit elucidates its Purpose of being in Coexistence.  The answer to the question - Why any unit is at all there in Existence? - is found from recognizing their Innate-nature.  Innate-nature itself is the Value or Originality of a being.  My getting established in my Innate-nature becomes natural (spontaneous) upon recognizing my Purpose of being." - Shree A. Nagraj.

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