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Tuesday, March 10, 2015

Three Levels of Truth


All Existence is Coexistence (Matter saturated in the Absolute Brahman) as Fundamental Truth

Coexistence is manifest as four natural orders, and each manifestation of Coexistence is inseparable presence of form, qualities, intrinsic-nature and religion as Manifested Truth 

A manifestation’s participation in universal order is known as Evident Truth 

The Evident Truth is perceptible (or observable through senses) to human being.  The Manifested Truth is partly perceptible and partly cognizable (or that which gets comprehended in buddhi and realized in atma).  The aspects of form, constructive qualities and destructive qualities of a manifestation are perceptible, while the aspects of intrinsic-nature and religion are only cognizable.  The Fundamental Truth of Coexistence is only congnizable, i.e. it only comes into human being's realization.

- based on Madhyasth Darshan

सत्य के तीन स्तर

सम्पूर्ण अस्तित्व सह-अस्तित्व (सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति) है - यह स्थिति सत्य है.

सह-अस्तित्व चार अवस्थाओं के रूप में प्रगट है.  सह-अस्तित्व का हर प्रगटन रूप, गुण, स्वभाव, धर्म का अविभाज्य वर्तमान है - यह वस्तुगत सत्य है.

प्रगटित वस्तु का सार्वभौम व्यवस्था में भागीदारी का स्वरूप ही वस्तु-स्थिति सत्य है. 

वस्तुस्थिति सत्य मानव के लिए इन्द्रियगोचर है.  इन्द्रियगोचर का मतलब - जो इन्द्रियों से पहचान में आये.  वस्तुगत सत्य का कुछ भाग इन्द्रियगोचर है तथा कुछ भाग ज्ञानगोचर है.  ज्ञानगोचर का मतलब जो बोध और अनुभव में  आये.  रूप, सम और विषम गुण इन्द्रियगोचर हैं, जबकि स्वभाव और धर्म केवल ज्ञानगोचर हैं।  स्थिति सत्य या सह-अस्तित्व केवल ज्ञानगोचर है - जो केवल मानव के अनुभव में आता है. 

- मध्यस्थ दर्शन पर आधारित 

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