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Friday, September 21, 2012

अनुभव और प्रमाण


अनुभव व्यक्ति में होता है.  उसका प्रमाण परंपरा में होता है.  प्रमाण का स्वरूप है – मानवीयता, देव-मानवीयता, और दिव्य-मानवीयता.  मानवीयता परिवार के स्तर पर है.  देव-मानवीयता समाज के स्तर पर है.  दिव्य-मानवीयता सम्पूर्ण धरती के स्तर पर है.  अमानवीयता (जीव चेतना) से मानवीयता (((((मानव चेतना) एक संक्रमण है.  वह व्यक्ति के स्तर पर है.  मानवीयता से अनुभव के प्रमाण की शुरुआत है.  सम्पूर्ण धरती पर सभी मानवों के जागृत होने पर दिव्य-मानवीयता का संक्रमण है.  

 -  श्री ए नागराज के साथ संवाद पर आधारित (अप्रैल २००८, अमरकंटक)

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