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Saturday, August 18, 2012

जीना

"जीवन विद्या जीने के लिए है, केवल बोलने के लिए नहीं" - बाबा इस बात पर बारम्बार ध्यान दिलाते हैं।  फिर भी इसका महत्त्व पूरी तरह अभी समझ नहीं आया है।  विद्या को बोलना आ जाना पर्याप्त नहीं है, इसको जीना ही पर्याप्त है।  अपनी विद्वता से दूसरों को प्रभावित करने की दौड़ में अपना जीना कहीं छूट जाता है।  सच बात तो यह है जिनको हम प्रभावित करने के लिए दौड़ रहे होते हैं, उनका वास्तव में हमारे जीने से कोई मतलब भी नहीं होता।  जिनको हमारे जीने से मतलब होता है, उनको हमारे बोलने से ज्यादा मतलब नहीं होता। 

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