
"समझ" क्या चीज है? - इसका उत्तर मध्यस्थ-दर्शन से ६ बिन्दुओं में है।
नियम, नियंत्रण, संतुलन, न्याय, धर्म, और सत्य।
पूरा समझ इन ६ बिन्दुओं से इंगित है। इससे अधिक समझ हो नहीं सकती, इससे कम में आदमी उपकारी तो नहीं होगा। इसको मैंने अच्छी तरह से जाँचा है, जी कर देखा है। आदमी को इन ६ मुद्दों में पारंगत होने की आवश्यकता है। इसी का नाम है - अध्ययन।
नियम एक वास्तविकता है। नियंत्रण एक वास्तविकता है। संतुलन एक वास्तविकता है। न्याय एक वास्तविकता है। धर्म एक वास्तविकता है। सत्य एक वास्तविकता है।
इन वास्तविकताओं के बारे में हमें पूरा अध्ययन होना, उसमें पारंगत होना, और प्रमाणित होना - ये तीन स्थितियां हैं। मानव जाति जब कभी भी इस को समझने तक पहुंचेगा, हम समुदाय चेतना में जियेंगे नहीं! मानव चेतना में ही जियेंगे। समुदाय चेतना जीव-चेतना को इंगित करता है। मानव-चेतना सार्वभौम-चेतना को इंगित करता है। इस तरह - जब कभी भी ये ६ बातें हमको समझ में आ जाती हैं, हम सार्वभौम चेतना में जीने लायक हो जाते हैं। इन्ही ६ बातों को समझाने के लिए मेरा सारा प्रयत्न है।
इन ६ बातों को समझाने के लिए ५ सूत्र दिए।
(१) सह-अस्तित्व
(२) सह-अस्तित्व में विकास-क्रम
(३) सह-अस्तित्व में विकास
(४) सह-अस्तित्व में जागृति-क्रम
(५) सह-अस्तित्व में जागृति
जब मैं इन पाँच सूत्रों को समझाने गया तो मेरे मित्र लोगों ने कहा - यह किसी को समझ नहीं आएगा, इसका विस्तृत रूप में व्याख्या करना होगा। सूत्रित करना होगा। तब उसको दर्शन, विचार (वाद), और शास्त्र रूप में व्यक्त किए।
- जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन में बाबा श्री नागराज शर्मा के उदबोधन पर आधारित (२२ अक्टूबर २००५, मसूरी)
नियम, नियंत्रण, संतुलन, न्याय, धर्म, और सत्य।
पूरा समझ इन ६ बिन्दुओं से इंगित है। इससे अधिक समझ हो नहीं सकती, इससे कम में आदमी उपकारी तो नहीं होगा। इसको मैंने अच्छी तरह से जाँचा है, जी कर देखा है। आदमी को इन ६ मुद्दों में पारंगत होने की आवश्यकता है। इसी का नाम है - अध्ययन।
नियम एक वास्तविकता है। नियंत्रण एक वास्तविकता है। संतुलन एक वास्तविकता है। न्याय एक वास्तविकता है। धर्म एक वास्तविकता है। सत्य एक वास्तविकता है।
इन वास्तविकताओं के बारे में हमें पूरा अध्ययन होना, उसमें पारंगत होना, और प्रमाणित होना - ये तीन स्थितियां हैं। मानव जाति जब कभी भी इस को समझने तक पहुंचेगा, हम समुदाय चेतना में जियेंगे नहीं! मानव चेतना में ही जियेंगे। समुदाय चेतना जीव-चेतना को इंगित करता है। मानव-चेतना सार्वभौम-चेतना को इंगित करता है। इस तरह - जब कभी भी ये ६ बातें हमको समझ में आ जाती हैं, हम सार्वभौम चेतना में जीने लायक हो जाते हैं। इन्ही ६ बातों को समझाने के लिए मेरा सारा प्रयत्न है।
इन ६ बातों को समझाने के लिए ५ सूत्र दिए।
(१) सह-अस्तित्व
(२) सह-अस्तित्व में विकास-क्रम
(३) सह-अस्तित्व में विकास
(४) सह-अस्तित्व में जागृति-क्रम
(५) सह-अस्तित्व में जागृति
जब मैं इन पाँच सूत्रों को समझाने गया तो मेरे मित्र लोगों ने कहा - यह किसी को समझ नहीं आएगा, इसका विस्तृत रूप में व्याख्या करना होगा। सूत्रित करना होगा। तब उसको दर्शन, विचार (वाद), और शास्त्र रूप में व्यक्त किए।
- जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन में बाबा श्री नागराज शर्मा के उदबोधन पर आधारित (२२ अक्टूबर २००५, मसूरी)
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