* पठन विधि से।
* भाषण विधि से।
* उपदेश विधि से।
* या प्रमाण विधि से।
उत्तर: प्रमाण विधि से ही प्रबोधन सार्थक है। प्रमाण विधि से प्रबोधन का मतलब है इस सत्यापन के साथ प्रस्तुत होना - "जो मैं कह रहा हूँ, उसको मैं समझा हूँ, पारंगत हूँ, और जीता हूँ।" उससे कम में प्रबोधन सफल नहीं हो सकता।
प्रश्न : जब तक पारंगत नहीं हुए हैं तब तक क्या करें?
उत्तर: पारंगत होने के लिए अध्ययन कीजिये। तब तक reference के साथ, अपनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रस्तुत कीजिये।
- बाबा श्री नागराज शर्मा के साथ संवाद पर आधारित मेरी प्रस्तुति एक विद्यार्थी की हैसियत से है।

0 comments:
Post a Comment